वाराणसी में मानवता की मिसाल पेश करते हुए उत्तर प्रदेश के जननायक धनंजय सिंह ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि जनता के दुख-दर्द में वे हमेशा सबसे आगे रहते हैं। कबीरूद्दीनपुर निवासी श्री रामजीत यादव, जिनके पुत्र स्व. अनुराग यादव के असमय निधन के बाद परिवार गहरे सदमे में था, इन दिनों लीवर सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। उनकी हालत की जानकारी जैसे ही जननायक धनंजय सिंह को बेटी आराधना यादव के फोन के माध्यम से मिली, उन्होंने तत्काल संवेदनशीलता दिखाते हुए बी.एच.यू. अस्पताल प्रशासन से संपर्क साधा। जननायक ने स्वयं फोन पर संबंधित विभाग के अधिकारियों से बात करते हुए इलाज़ में तेजी लाने, सभी चिकित्सीय सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराने और मरीज के परिवार को हर संभव सहायता देने के निर्देश दिए। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने संगठन “राष्ट्रवादी नौजवान सभा” के कार्यकर्ताओं को भी यह निर्देश दिया कि वे लगातार अस्पताल में उपस्थित रहकर मरीज व परिजनों की हर जरूरत का ख्याल रखें। जननायक की इस मानवीय पहल के बाद बी.एच.यू. अस्पताल प्रशासन ने स्वयं आगे आकर इलाज़ की प्रक्रिया में तेजी व पारदर्शिता लाने का भरोसा दिलाया। इसके पश्चात धनंजय सिंह स्वयं भी अस्पताल पहुंचे और डॉक्टरों से रामजीत यादव की स्थिति की विस्तृत जानकारी ली।

इस अवसर पर उन्होंने कहा— जनसेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। किसी की पीड़ा देखकर आंखें मूंद लेना राजनीति नहीं, संवेदनहीनता है। मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि रामजीत यादव जी शीघ्र स्वस्थ हों।अस्पताल के बाहर जुटे स्थानीय लोगों ने भी जननायक के इस कदम की भूरि-भूरि प्रशंसा की। कई लोगों ने कहा कि “ऐसे नेता बहुत कम होते हैं जो जनता की पुकार सुनते ही खुद पहुंच जाते हैं। जननायक धनंजय सिंह ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि राजनीति सिर्फ सत्ता का नहीं, बल्कि संवेदनशील नेतृत्व और मानवीय सेवा का माध्यम है।
