धनंजय सिंह: राजनीति के शोर में एक साहसी और पारदर्शी आवाज़,, कफ सिरप विवाद में सियासी तूफ़ान पर धनंजय सिंह बने सच और साहस की सबसे बुलंद आवाज़!
जौनपुर में कफ़ सिरफ़ प्रकरण को लेकर जहां राजनीतिक गलियारों में आरोप–प्रत्यारोप की आग धधक रही है, वहीं पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने तथ्यों, पारदर्शिता और संवैधानिक व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का दुर्लभ उदाहरण पेश किया है। विपक्ष द्वारा निराधार आरोपों, भ्रामक सूचना और राजनीतिक भ्रम फैलाने की कोशिशों के बीच धनंजय सिंह ने जिस संयम, संतुलन और साहस का परिचय दिया है, उसने न सिर्फ़ जौनपुर बल्कि पूरे प्रदेश में उनकी छवि को और भी मजबूत किया है। जहां राजनीतिक हमलों पर संयम—नेताओं में अब विरले ही दिखता है ऐसा दृष्टिकोण जब कई नेता राजनीतिक हमलों का जवाब राजनीति से देते हैं, वहीं धनंजय सिंह ने बिना किसी उत्तेजना के साफ कहा कि “सत्य की स्थापना ही मेरा लक्ष्य है। उन्होंने काशी/वाराणसी से जुड़े इस प्रकरण में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की छवि को निशाना बनाने की कोशिशों पर गहरी आपत्ति जताते हुए यह भी कहा कि व्यापक जांच से सच खुद सामने आ जाएगा। सिस्टम पर भरोसा, व्यवस्था पर विश्वास—यही है लोकतांत्रिक परिपक्वता। जहां धनंजय सिंह ने न सिर्फ़ राज्य सरकार द्वारा चल रही बहु-एजेंसी जांच पर भरोसा जताया, बल्कि इंटर-स्टेट एंगल को देखते हुए सीबीआई जांच की भी औपचारिक मांग की। उनका यह कदम दर्शाता है कि वे न केवल खुद जांच से डरते नहीं, बल्कि चाहते हैं कि दोषी कोई भी हो—उसे कठोरतम सज़ा मिले। आज की राजनीति में जहां अक्सर जांच से बचने की कोशिशें होती हैं, वहीं धनंजय सिंह का यह रुख उन्हें भीड़ से अलग खड़ा करता है।

भ्रामक खबरों को चुनौती—पत्र लिखकर दिया मजबूत संदेश।
धनंजय सिंह ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर यह स्पष्ट किया कि किसी भी कीमत पर प्रदेश की छवि धूमिल करने का प्रयास सफल नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि झूठी खबरें फैलाने वालों का सच देश के सामने आना चाहिए। यह कदम न सिर्फ़ राजनीतिक साहस का परिचायक है, बल्कि यह दिखाता है कि वे पारदर्शिता को लेकर कितने गंभीर हैं। जनता का भरोसा—एक बार फिर मजबूत जौनपुर और आसपास के क्षेत्रों में चर्चा है कि धनंजय सिंह ने जिस साहस और शालीनता से पूरे मामले को संभाला है, वह बेहद प्रशंसनीय है।
जनता का कहना है कि— ऐसी स्पष्टवादिता और व्यवस्था में विश्वास रखने वाले नेता आज के समय में कम ही मिलते हैं।राजनीति में आरोपों की आंधियों में अक्सर कई चेहरे धुंधले हो जाते हैं, परन्तु कुछ लोग ऐसे होते हैं जो इन आंधियों में भी अपनी पहचान और सत्यनिष्ठा को मजबूत करते हैं। धनंजय सिंह उन्हीं में से एक हैं। उनका यह रुख न सिर्फ़ उन्हें एक जिम्मेदार नेता सिद्ध करता है, बल्कि प्रदेश की राजनीति में उनकी साख को और ऊंचा उठाता है।
धनंजय सिंह— सिर्फ़ एक नाम नहीं, बल्कि सच्चाई और साहस की आवाज़।
