तीर्थ यात्रा में तन मन धन से सहयोग देने वाला ऐश्वर्य की प्राप्ति करता है -मुनि भाव सागर महराज, मुनि संघ के नगर आगमन पर जैन समाज के लोगों द्वारा अपने-अपने घरों के सामने आरती उतारने के साथ पाद प्रक्षालन किया गया

अकलतरा – महासमाधि धारक परम पूज्य
आचार्य विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित एवं परम पूज्य आचार्य समय सागर महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री धर्म सागर महाराज एवं
मुनि भाव सागर महाराज का तरौद, अग्रसेन चौक ,अंबेडकर चौक , शास्त्री चौक होते हुए नगर आगमन हुआ , जैन समाज के लोगों द्वारा गाजे बाजे के साथ मुनिसंघ का भव्य स्वागत किया गया, आचार्य विद्यासागर महाराज की जय हो के नारो से नगर गूंज उठा, जैन समाज के लोगों द्वारा अपने अपने घरों के सामने मुनिसंघ की आरती करने के साथ पाद प्रक्षालन किया गया, जैन मंदिर में मुनिसंघ द्वारा भगवान की मूर्तियों का दर्शन करने के साथ विश्व में शांति की कामना हेतु शांति धारा कराई गई, जैन समाज के अध्यक्ष राजेश जैन एवं सचिव रूपेश जैन द्वारा मुनि संघ की पदयात्रा में सहयोग देने वाले चंद्रशेखर आजाद जैन एवं नरेन्द्र जैन का शाल एवं श्रीफल भेंटकर सम्मान किया गया, मुनि धर्म सागर महराज को आहारदान करने का सौभाग्य परिवार राहुल जैन रोशनी जैन परिवार भाव सागर को आहारदान करने का सौभाग्य सुभाष जैन
सौरभ जैन परिवार को प्राप्त हुआ, जैन मंदिर में धर्म सभा को संबोधित करते हुए
मुनि भाव सागर जी महाराज ने कहा कि 12 वर्ष बाद नगर में दूसरी बार आगमन हुआ,
हमारी यात्रा 500 किलोमीटर की पदयात्रा पूर्ण कर चुकी है 600 किलोमीटर की यात्रा अभी भी शेष है, जैन मंदिर के 100 वर्ष प्राचीन मुनिसुब्रतनाथ भगवान के दर्शन करके मन प्रफुल्लित हो गया , मंत्र एवं स्त्रोत पावरफुल होते हैं प्रतिदिन इनका जाप करना चाहिए, अच्छी भावना करने से अच्छा कार्य होता है, तीर्थ यात्रा में तन, मन ,धन से सहयोग देने वाला ऐश्वर्य की प्राप्ति करता है, समाज के प्रत्येक लोगों को तीर्थ यात्रा में अपना पूर्ण सहयोग प्रदान करना चाहिए, महिलाओं , बालिकाओं,बालकों, नवयुवकोंको अपनी आमदनी में से धन अवश्य चाहिए जिससे वह दान कर सकें धार्मिक कार्य कर सकें और उनकी जो आवश्यकताऐ है उनकी पूर्ति हो सकें,
परम पूज्य आचार्य श विद्यासागर महाराज के चरण के जब भी दर्शन करो तो यह भावना करो कि साक्षात आचार्य श्री के ही दर्शन हो रहे हैं, आत्म संयम की रक्षा अपने खजाने की समान ही करो , अपना हित करने से दूसरे का हित होता ही है ,महापुरुषों की चेष्टा आश्चर्य जनक होती है, धर्म विपत्तियों में मुस्कुराना सिखलाता है , गुरु की महिमा से मनुष्य की सोई हुई शक्तियां जागती है , मूर्ख विद्वान एवं अपवित्र विचारों वाला शुद्ध बन जाता है, गुरुवाणी के प्रति समर्पण नहीं हो तो कुछ भी सीखा नहीं सकता ,जगत में शिष्य उच्चारण से नहीं उच्च आचरण से शोभित होता है, हृदय लोक में शिष्यों का उदय हुए बिना गुरु प्राप्ति संभव नहीं, गुरु अनुभवी होते हैं वह अनेकों उतार चढ़ाव देख चुके होतें हैं, समस्त सिद्धियां को देने वाला संयम होता है,संयम मनुष्य जीवन का प्राण है, जीवन रूपी कार में संयम रूपी ब्रेक होना चाहिए। सत्य के परिज्ञान होने पर वैराग्य भावना के साथ धारण किया संयम हँसी खुशी को देता है। जीवन की कीमत संयम, नियम व्रत से होती है। संयम बन्धन नहीं, बल्कि वह संसार से छुड़ाने वाला तथा वन्दनीय पूज्यनीय बनाने वाला है, प्राणी संयम धारी को अपने हृदय को दया, करुणा से श्रृगारित करना चाहिए, कार्यक्रम में जैन समाज के अध्यक्ष राजेश जैन, उपाध्यक्ष श्रीजीत जैन, विमल जैन, सचिव रूपेश जैन, सह सचिव राजा जैन, कोषाध्यक्ष सुबोध जैन, वीरेन्द्र जैन, सुशील जैन, प्रकाश जैन, विनोद जैन, विजय जैन, सुनील जैन, राजकुमार जैन, रवि जैन, राकेश जैन, राजू जैन, संजय जैन, सोपनिल जैन, रितेश जैन, कमल जैन, मनोज जैन, नितिन जैन, आनंद जैन, सौरभ जैन, दीपक जैन, श्रीनिकेत जैन,
बिशु जैन, गीतेश जैन, तनिष जैन एवं जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
