पप्पू अली की खास रिपोर्ट
सीपत क्षेत्र में हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। बीती रात्रि ग्राम निपनिया में एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां एक भटके हुए हाथी ने तीन गायों को कुचलकर मौत के घाट उतार दिया। इस घटना से पूरे गांव में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले एक सप्ताह से यह हाथी सीपत के आसपास के कई गांवों में घूमते हुए देखा जा रहा है, जिससे लोगों में भारी चिंताएँ बढ़ रही हैं।
ग्राम पंचायत के जागरूक नागरिक पप्पू अली ने बताया कि हाथी पिछले कई दिनों से सीपत क्षेत्र के अलग-अलग गांवो किनारे स्थित बस्तियों सहित कई नजदीकी इलाकों—में विचरण कर रहा है। हाथी के आने की वजह से ग्रामीण शाम ढलते ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं। खेतों और बाड़ों में मवेशियों को छोड़ना भी जोखिम भरा हो गया है। वन विभाग की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं हो पाई, जिसके कारण गांवों में डर लगातार बढ़ रहा है। बीती रात की घटना ने इस आशंका को और भी गहरा कर दिया। रात करीब 2 बजे के आसपास हाथी ग्राम निपनिया के एक बाड़ा में घुस आया। वहां बंधी तीन गायें उसके हमले का शिकार हो गईं।
लोगों का कहना है कि हाथी ने बाड़े में काफी तोड़फोड़ भी की, जिससे ग्रामीणों में और अधिक दहशत फैल गई। आवाज सुनकर मौके पर पहुंचे लोगों ने दूर से ही स्थिति को देखने की कोशिश की, लेकिन हाथी के उग्र व्यवहार को देखते हुए कोई भी पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा सका।
घटना की जानकारी मिलने के बाद सुबह ग्रामीणों की भीड़ बाड़ा स्थल पर इकट्ठा हो गई। तीनों गायों के शव देखकर ग्रामीणों में रोष और दुख दोनों देखा गया। गायों के मालिक बेहद सदमे में हैं, क्योंकि मवेशी ग्रामीणों की आजीविका का मुख्य साधन होते हैं। इलाके के किसानों ने हाथी के लगातार विचरण से होने वाले संभावित नुकसान की भी चिंता जताई है।
ग्रामीणों ने वन विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही हाथी को सुरक्षित तरीके से जंगल की ओर नहीं भगाया गया, तो भविष्य में और बड़ी घटना होने की संभावना है। गांव वालों ने रात में पेट्रोलिंग बढ़ाने, गांव-गांव में चेतावनी संदेश पहुंचाने और हाथी की गतिविधियों पर लगातार नजर रखने की मांग भी की है।
अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की है कि हाथी को देखकर भीड़ न लगाएं और न ही उसे उकसाने की कोशिश करें। विभाग का कहना है कि हाथी संभवतः भोजन और पानी की तलाश में गांवों की ओर भटक आया है।
ग्राम निपनिया की यह घटना वन विभाग की व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े करती है। ग्रामीण उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही इस समस्या का समाधान हो, ताकि वे सुरक्षित वातावरण में अपने खेतों और घरों में काम कर सकें।
