
सुदीप यादव/सामरी
प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (प्रधानमंत्री जन-मन योजना) के तहत आदिवासी विकासखंड कुसमी की ग्राम पंचायत धनेशपुर अंतर्गत आश्रित ग्राम छुरा कोना तक बनाई जा रही सड़क में गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। यह क्षेत्र विशेष रूप से पहाड़ी कोरवा जनजाति की बहुलता वाला दुर्गम इलाका है, जहाँ यह सड़क ग्रामीणों के लिए जीवनरेखा मानी जा रही थी।
इस सड़क निर्माण कार्य की कुल स्वीकृत लागत 1 करोड़ 91 लाख 25 हजार रुपये बताई जा रही है, जिसमें लगभग 3 किलोमीटर लंबी डामर युक्त सड़क का निर्माण प्रस्तावित है। कार्य का जिम्मा मैसर्स एल.सी. कटरे, मिशन रोड राताखार, जिला कोरबा को दिया गया है।
लेकिन निर्माण की गुणवत्ता को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय ग्रामीणों द्वारा उपलब्ध कराए गए वीडियो फुटेज और प्रत्यक्ष स्थिति के अनुसार, नवनिर्मित डामर सड़क की हालत इतनी खराब है कि साधारण झाड़ू लगाने मात्र से ही डामर और गिट्टी उखड़कर एक जगह इकट्ठा हो जा रही है। इससे साफ जाहिर होता है कि निर्माण में मानक सामग्री और निर्धारित तकनीक का पालन नहीं किया गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में घटिया किस्म की बालू और 60 एमएम गिट्टी का उपयोग कर सड़क किनारे तटबंध तैयार किया जा रहा है, जो आने वाले बरसात के मौसम में सड़क के जल्दी क्षतिग्रस्त होने का बड़ा कारण बन सकता है। पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्र होने के कारण यह सड़क आदिवासी समुदाय के लिए आवागमन, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी सुविधाओं की उम्मीद थी, लेकिन भ्रष्टाचार और लापरवाही ने योजना के उद्देश्य पर ही प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।
जब इस पूरे मामले में संबंधित ठेकेदार से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया, जिससे संदेह और गहरा गया।
वहीं इस संबंध में, उप अभियंता रामकुमार तिर्की ने कहा –
प्रधानमंत्री जन-मन योजना ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा—
ठेकेदार द्वारा निर्माण कार्य ठीक कराया जा रहा है। ग्रेडर चलने के कारण कहीं-कहीं सड़क उबड़-खाबड़ हो गई होगी।
इस पर कलेक्टर बलरामपुर राजेंद्र कटारा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा—
मुझे सड़क की जानकारी दे दीजिए, मैं इसे दिखवा लेता हूँ।
हालांकि उप अभियंता के इस बयान से ग्रामीण संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण होता, तो सड़क की परत इतनी कमजोर नहीं होती कि झाड़ू लगते ही उखड़ने लगे।
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन एवं उच्च स्तरीय जांच एजेंसियों से मांग की है कि सड़क निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए और दोषी ठेकेदार व जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि आदिवासी अंचल के विकास के नाम पर हो रहे भ्रष्टाचार पर रोक लगाई जा सके।
