Wednesday, February 11, 2026
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हिंडालको टाटीझरिया माइंस का स्वास्थ्य केंद्र बदहाल, 4 माह से डॉक्टर नदारद—500 से अधिक मजदूर व 10 किमी के ग्रामीण इलाज से वंचित,, दुर्घटना संभावित खदान क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की भारी अनदेखी, इलाज के लिए भटकने को मजबूर लोग


सुदीप यादव/सामरी
सामरी। ग्राम टाटीझरिया स्थित हिंडालको इंडस्ट्रीज लिमिटेड, खान प्रभाग सामरी के अंतर्गत संचालित कौशल विकास केंद्र का स्वास्थ्य केंद्र गंभीर अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ा हुआ है। ग्रामीणों से प्राप्त जानकारी के अनुसार यह स्वास्थ्य केंद्र जनसेवा के उद्देश्य से स्थापित किया गया था, जहां खदान के मजदूरों सहित आसपास के ग्रामीणों का निःशुल्क उपचार होना था। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है।

बताया गया कि टाटीझरिया माइंस में कार्यरत 500–600 मजदूरों के साथ-साथ खंभिया, धावई टोला, बेदपानी, मेलपैरा, पीकरापाठ, म्युरनाचा, रीरी झरिया, चरहट कला, पूर्व टाटीझरिया, सोरेंगदाग, लक्ष्मणपुर, आसानपानी, हनुमात, बरदारा सहित लगभग 10 किलोमीटर के दायरे के ग्रामीणों के लिए यही एकमात्र स्वास्थ्य केंद्र है। खदान में दुर्घटना की स्थिति में भी प्राथमिक उपचार यहीं होना है।
ग्रामीणों का आरोप है कि यहां पहले पदस्थ डॉक्टर डॉ. लाडली हसन पिछले चार महीनों से अनुपस्थित हैं। वर्तमान में यह स्वास्थ्य केंद्र महज एक नर्स के भरोसे संचालित हो रहा है, जिससे न तो मजदूरों को और न ही ग्रामीणों को समुचित इलाज मिल पा रहा है।

ग्रामीण अर्जुन नगेसिया ने बताया__

यह आज की समस्या नहीं है। पहले भी हम यहां आए हैं, लेकिन सही इलाज नहीं मिलता। बुखार तक की दवा नहीं दी जाती।

वहीं सुनील यादव ने मीडिया से कहा__

मेरे पैर में दर्द है, आज भी अस्पताल आया था, लेकिन डॉक्टर नहीं हैं। चार महीने से न दवा मिल रही है, न इलाज। कहा जाता है कि दवा उपलब्ध नहीं है।

अनिल यादव ने पीड़ा जाहिर करते हुए कहा__

यह अस्पताल हिंडालको के सौजन्य से ग्रामीणों और मजदूरों के लिए खोला गया था। लेकिन गंभीर चोट लगने पर इंजेक्शन तक नहीं दिया जाता। अब तो बुखार के लिए पैरासिटामोल भी नहीं मिलती। आज ही दो महिलाएं दूर से पैदल चलकर आईं, लेकिन उनका इलाज नहीं हो सका। इससे खदान के मजदूर भी भारी परेशानी झेल रहे हैं।

इस गंभीर मामले पर हिंडालको के सीएसआर प्रमुख विजय मिश्रा से पक्ष जानने का प्रयास किया गया__
लेकिन उनका मोबाइल फोन बंद पाया गया।

ग्रामीणों और मजदूरों ने हिंडालको प्रबंधन व प्रशासन से मांग की है कि स्वास्थ्य केंद्र में तत्काल डॉक्टर की नियुक्ति, दवाओं की नियमित उपलब्धता और आपात चिकित्सा सुविधाएं बहाल की जाएं, ताकि क्षेत्र के लोगों को उनका हक का इलाज मिल सके।

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