आजादी के 78 वर्षों बाद छत्तीसगढ़ के जांजगीर–चांपा जिले के ग्राम पंचायत केसला के लिए आज का दिन इतिहास में दर्ज हो गया। वो गांव, जहां अब तक एक भी बाजार नहीं था, जहां के ग्रामीणों को सब्ज़ी, राशन और घरेलू सामान के लिए 5 किलोमीटर पैदल चलकर दूसरे गांवों का सहारा लेना पड़ता था। आज उसी गांव में पहली बार साप्ताहिक बाजार सजा और गांव खुशियों से झूम उठा।

इस ऐतिहासिक बदलाव के पीछे नाम है– नवनिर्वाचित सरपंच अंबिका-अर्जुन यादव का कुशल नेतृत्व, मजबूत इच्छाशक्ति और अथक प्रयास का परिणाम सरपंच अंबिका अर्जुन यादव ने पदभार संभालते ही गांव के विकास को प्राथमिकता दी। गांव के गणमान्य नागरिकों की सर्वसम्मति, प्रशासनिक तालमेल और निरंतर प्रयासों से हर सप्ताह शुक्रवार को साप्ताहिक बाजार लगाने का निर्णय लिया गया। और आज — ग्राम केसला में ऐतिहासिक पहला बाजार सफलतापूर्वक लगा।

विकास की नई कहानी लिख रहा है केसला– केवल बाजार ही नहीं, सरपंच अंबिका अर्जुन यादव के नेतृत्व में ग्राम केसला ने कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं —
पूरी तरह नशा-मुक्त गांव की मिसाल।
सैकड़ों एकड़ शासकीय भूमि से अवैध कब्जा मुक्त।
ग्रामीणों को रोजगार के नए अवसर।
अब जरूरत की हर चीज गांव में ही उपलब्ध।
ग्रामीणों के चेहरे पर मुस्कान– बाजार जुड़ते ही गांव में उत्सव जैसा माहौल है। ग्रामीणों का कहना है — जो काम 78 साल में नहीं हुआ, वो हमारे सरपंच ने कर दिखाया। आज केसला के लोग सरपंच अंबिका अर्जुन यादव की भूरी-भूरी प्रशंसा कर रहे हैं और उनके नेतृत्व को गांव के उज्ज्वल भविष्य की गारंटी बता रहे हैं। ग्राम केसला की यह कहानी बताती है कि अगर नेतृत्व ईमानदार और सोच विकास की हो, तो गांव की तक़दीर बदली जा सकती है। यह सिर्फ एक बाजार नहीं… यह आत्मनिर्भरता, सम्मान और विकास की शुरुआत है।
