अब गांव की महिलाएं नहीं रहीं पीछे… नाबार्ड की ‘ग्राम दुकान’ से खुला आत्मनिर्भरता का नया द्वार! हुनर को मिला बाजार, मेहनत को मिला सम्मान – राजनांदगांव की महिलाएं लिख रहीं सफलता की नई कहानी।

रायपुर/राजनांदगांव, 11 फरवरी 2026। गांव की गलियों से निकलकर अब महिलाएं सीधे बाजार की कमान संभाल रही हैं। राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) की अभिनव पहल ‘ग्राम दुकान’ ने स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को न सिर्फ आर्थिक मजबूती दी है, बल्कि आत्मसम्मान और आत्मविश्वास की नई पहचान भी दी है। राजनांदगांव के प्रसिद्ध पाताल भैरवी मंदिर के पास स्थापित ‘ग्राम दुकान’ आज ग्रामीण महिला उद्यमिता का जीवंत उदाहरण बन चुकी है। यहां स्थानीय महिलाओं द्वारा अपने हाथों से तैयार किए गए उत्पाद श्रद्धालुओं और ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं।
गांव के स्वाद और परंपरा का संगम:– इस दुकान में पूजा सामग्री से लेकर अचार, पापड़, मुरकू, बिजौरी, मुरब्बा, मसाले, अगरबत्ती, मोमबत्ती, साबुन, मशरूम, जिमीकंद, कपड़े, दोना-पत्तल और डेकोरेशन आइटम्स तक—हर वह वस्तु उपलब्ध है जो गांव की मेहनत और परंपरा की खुशबू बिखेरती है। महिलाएं अब अपने उत्पादों की आकर्षक पैकेजिंग कर उन्हें बाजार में उतार रही हैं, जिससे उन्हें नियमित आय का स्रोत मिल रहा है।
मंदिर की आस्था बनी आमदनी का जरिया:– ग्राम दुकान की संचालिका श्रीमती निशा मंडावी बताती हैं कि मंदिर के समीप होने से यहां आने वाले श्रद्धालुओं से उत्पादों को अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। इससे बिक्री में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है और समूह की महिलाओं का उत्साह दोगुना हो गया है।
निःशुल्क दुकान, मजबूत भविष्य:– नाबार्ड द्वारा इस योजना के तहत महिलाओं को नि:शुल्क दुकान उपलब्ध कराई गई है। इससे उन्हें स्थायी बाजार मंच मिला है और वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। यह पहल न केवल महिला सशक्तिकरण का सशक्त उदाहरण है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती दे रही है।
गांव की बेटियां अब रोजगार मांग नहीं रहीं… खुद रोजगार बना रहीं!
नाबार्ड की ‘ग्राम दुकान’ योजना साबित कर रही है कि अगर अवसर और मंच मिले, तो ग्रामीण महिलाएं भी सफलता की नई इबारत लिख सकती हैं।यह पहल आज पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन चुकी है—जहां हुनर को बाजार मिला है और मेहनत को पहचान।
