Wednesday, February 18, 2026
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जांजगीर-चांपा में अवैध रेत का खेल: कार्रवाई का ढोल, देवरी-खोरसी में खुला ‘खनन महोत्सव!

जांजगीर-चांपा में अवैध रेत का खेल: कार्रवाई का ढोल, देवरी-खोरसी में खुला ‘खनन महोत्सव!

18 फरवरी 2026 को जांजगीर-चांपा जिले में अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई का दावा किया गया—2 चैन माउंटेन मशीन और 3 ट्रैक्टर जब्त। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई सिर्फ ‘दिखावे’ की थी? क्योंकि जिन इलाकों में सबसे ज्यादा अवैध खनन की शिकायतें हैं, वहां अब भी रात-दिन मशीनें गरज रही हैं। जिला कलेक्टर जन्मेजय महोबे के निर्देशन में राजस्व, पुलिस और खनिज विभाग की टीम ने तहसील बम्हनीडीह के ग्राम खपरीडीह और तहसील पामगढ़ के ग्राम देवरघटा में दबिश दी। कार्रवाई में मशीनें और ट्रैक्टर जब्त किए गए। प्रेस नोट जारी हुआ, फोटो खिंचे, और विभाग ने अपनी पीठ थपथपाई। लेकिन इसी देवरघटा-कमरीद के पास देवरी-खोरसी क्षेत्र में महानदी के किनारे कथित रूप से अवैध रेत उत्खनन का ‘मुख्य अड्डा’ आज भी सक्रिय बताया जा रहा है। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि यहां सबसे ज्यादा उत्खनन और परिवहन होता है—फिर भी वहां ठोस कार्रवाई क्यों नहीं?

देवरी-खोरसी: ‘नो-एंट्री’ ज़ोन या संरक्षित इलाका:– आरोप है कि देवरी-खोरसी में रात के अंधेरे में चैन माउंटेन मशीनें नदी का सीना चीरती हैं। दिन में ट्रैक्टर-हाइवा से खुलेआम परिवहन। विभागीय टीम कथित तौर पर आसपास के छोटे मामलों में कार्रवाई कर ‘उपलब्धि’ गिनाती है, पर मुख्य हॉटस्पॉट अछूता रहता है। क्या यह महज़ संयोग है? या फिर किसी के संरक्षण में चल रहा है यह कारोबार?

जनता में रोष, विभाग पर सवाल:– क्षेत्रीय ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद देवरी-खोरसी में निर्णायक कार्रवाई नहीं होती। इससे रेत माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। पर्यावरणीय नुकसान अलग—नदी की धारा बदलने और कटाव का खतरा बढ़ रहा है।

बड़े सवाल, जिनका जवाब ज़रूरी:–

1. देवरी-खोरसी में संयुक्त टीम की छापेमारी क्यों नहीं?

2. क्या खनिज विभाग को वहां की गतिविधियों की जानकारी नहीं—या फिर जानकर भी अनदेखी?

3. जब्त मशीनों की कार्रवाई के बाद भी मुख्य क्षेत्र में खनन कैसे जारी?

4. क्या उच्च स्तरीय जांच की जरूरत है?

अब नज़र प्रशासन पर:– खबर प्रकाशित होने के बाद क्या देवरी-खोरसी में भी सख्त कार्रवाई होगी? या फिर यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा? जिले में अवैध रेत का यह खेल अगर नहीं रुका, तो सवाल सिर्फ माफियाओं पर नहीं—जिम्मेदार अफसरों की कार्यप्रणाली पर भी उठेंगे।

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