शिवरीनारायण। अटूट आस्था, दृढ़ संकल्प और त्याग की प्रेरक मिसाल पेश करते हुए स्वामी निर्मल बाबा महाराज हिमालय की पावन वादियों में स्थित श्री धाम बद्रीनाथ से मां सरस्वती का पवित्र जल लेकर लगभग 3000 किलोमीटर की ऐतिहासिक पदयात्रा पर निकले हैं। इसी तपस्वी यात्रा के दौरान वे छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के पवित्र तीर्थ नगरी शिवरीनारायण पहुंचे, जहां श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा, आरती और जयघोष के साथ उनका भावभीना स्वागत किया। स्वामी जी की यह यात्रा केवल दूरी नापने का प्रयास नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना जगाने का एक महाअभियान है। वे उत्तराखंड से निकलकर कई राज्यों की सीमाएं पार करते हुए दक्षिण भारत के परम पावन तीर्थ रामेश्वरम धाम तक पैदल पहुंचने का संकल्प लेकर अग्रसर हैं। उनका उद्देश्य भगवान शिव के चरणों में मां सरस्वती का पवित्र जल अर्पित कर राष्ट्र की सुख-समृद्धि और विश्व कल्याण की प्रार्थना करना है।

बताया जाता है कि स्वामी निर्मल महाराज वर्तमान में सिद्धिविनायक मंदिर के अनन्य उपासक रहे हैं। सांसारिक वैभव, सुख-सुविधाओं और अपार संपत्ति का त्याग कर उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन ईश्वर भक्ति, सेवा और समाजहित के कार्यों को समर्पित कर दिया। सूत्रों के अनुसार उन्होंने अपनी बड़ी संपत्ति भी जनकल्याण के लिए दान कर दी है, जो उनके त्याग और समर्पण का प्रमाण है। करीब 3000 किलोमीटर की इस कठिन पदयात्रा में स्वामी जी दुर्गम पहाड़ियों, घने जंगलों और वनांचल मार्गों से गुजरते हुए निरंतर आगे बढ़ रहे हैं। छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्रों को पार करते समय भी उनका उत्साह और विश्वास अडिग दिखाई दिया। उनके अनुयायियों का कहना है कि यह यात्रा तप, साधना और आत्मबल का जीवंत उदाहरण है। स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं ने कहा कि स्वामी जी की यह पदयात्रा समाज में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार कर रही है। युवाओं और ग्रामीणों के लिए यह यात्रा प्रेरणा का स्रोत बन गई है, जो त्याग, सेवा और संकल्प की शक्ति को दर्शाती है। रामेश्वरम धाम पहुंचने पर विशेष पूजा-अर्चना, जलाभिषेक और भंडारा कार्यक्रम के साथ इस ऐतिहासिक यात्रा का समापन होगा। स्वामी निर्मल बाबा महाराज की यह पदयात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि समाज में सद्भाव, सेवा और आध्यात्मिक जागरण का संदेश भी दे रही है।
