शिवरीनारायण:- प्रसिद्ध कथावाचक दीनू महाराज के अनुसार होलिका दहन का शुभ मुहूर्त प्रदोष काल में तथा भद्रा रहित समय में करना अत्यंत फलदायी होता है। उन्होंने बताया कि शास्त्रों के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा की रात्रि में सूर्यास्त के बाद होलिका दहन करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है। उनके कथनानुसार होली के दिन प्रातःकाल से दोपहर तक रंगोत्सव मनाना शुभ माना गया है। साथ ही होलिका दहन में श्रद्धापूर्वक नारियल, गोबर के उपले, कपूर, लौंग एवं पीली सरसों अर्पित करने से सुख-समृद्धि और परिवार की रक्षा होती है। दीनू महाराज ने यह भी संदेश दिया कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि बुराइयों का दहन कर जीवन में प्रेम, सद्भाव और सकारात्मकता अपनाने का पर्व है।
भद्रा 2 मार्च सायं 5:53 से प्रारंभ समाप्ति काल 5: 29 तक
3 मार्च चंद्र ग्रहण दोपहर 3 : 18 से सायं 6: 47 तक मोक्ष
3 मार्च होलिका पूजन मुहूर्त. रात्रि 7 : 15 से 9: 15 तक
4 मार्च रंग उत्सव
अतः इस वर्ष 3 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा
