पंडित दीनदयाल शास्त्री ‘दीनू महाराज’ के अनुसार, इस वर्ष चैत्र नवरात्र का पावन पर्व गुरुवार, 19 मार्च 2026 से प्रारंभ होकर 27 मार्च को महानवमी एवं कन्या पूजन के साथ संपन्न होगा। यह नौ दिवसीय पर्व मां दुर्गा की आराधना, साधना और शक्ति उपासना का विशेष अवसर प्रदान करता है।शिवरीनारायण नगर के ज्योतिषाचार्य श्री दीनदयाल शास्त्री दीनू महराज ने बताया कि
इस वर्ष नवरात्र का आरंभ गुरुवार को होने के कारण देवी मां का आगमन डोली (पालकी) में माना जा रहा है। शास्त्रों के अनुसार देवी के आगमन का वाहन वर्षभर की परिस्थितियों का संकेत देता है। डोली या पालकी में आगमन को सामान्यतः सावधानी का संकेत माना गया है, जिससे देश-दुनिया में रोग, अशांति या आर्थिक चुनौतियों की संभावना व्यक्त की जाती है।
शास्त्रीय आधार: “शशिसूर्ये गजारूढ़ा शनिभौमे तुरंगमे।
गुरौ शुक्रे चदोलायां बुधे नौका प्रकीर्तिता।।”
इस श्लोक के अनुसार:
रविवार सोमवार: हाथी (गज)
मंगलवार शनिवार: घोड़ा
गुरुवार शुक्रवार: डोली (पालकी) बुधवार: नौका
देवी का प्रस्थान (विसर्जन):
इस वर्ष देवी मां का प्रस्थान शुक्रवार को होगा, जिससे उनका वाहन हाथी माना गया है। देवी पुराण के अनुसार गजवाहन से प्रस्थान शुभ वर्षा, समृद्धि एवं कृषि के लिए अनुकूल संकेत देता है।
नवरात्र के दिनवार पूजन कार्यक्रम:
19 मार्च: मां शैलपुत्री एवं घटस्थापना
20 मार्च: मां ब्रह्मचारिणी
21 मार्च: मां चंद्रघंटा
22 मार्च: मां कुष्मांडा
23 मार्च: मां स्कंदमाता
24 मार्च: मां कात्यायनी
25 मार्च: मां कालरात्रि
26 मार्च: मां महागौरी
27 मार्च: मां सिद्धिदात्री (महानवमी)
28 मार्च: पारण
घटस्थापना मुहूर्त (19 मार्च 2026):
श्रेष्ठ मुहूर्त: प्रातः 06:52 से 07:43 बजे तक
मुख्य अवधि: प्रातः 06:52 से 10:10 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: 11:47 से 12:36 बजे तक
यह नवरात्रि श्रद्धा, संयम और साधना के माध्यम से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, शक्ति और समृद्धि लाने का अवसर है। भक्तजन विधि-विधान से पूजा कर मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करें।
