
सुदीप यादव/ सामरी बलरामपुर
कुसमी। नगर पंचायत कुसमी के वार्ड क्रमांक 14 दर्रीपारा में भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती बड़े ही उत्साह और सम्मान के साथ मनाई गई। कार्यक्रम की शुरुआत से लेकर समापन तक पूरे क्षेत्र में उल्लास का वातावरण रहा।

समाज के कुछ सदस्यों में नाराज़गी की झलक भी सामने आयी, समाज प्रमुखों ने कहा कि— हम सब एक समाज के सदस्य हैं, छोटी-छोटी नाराज़गियां आपसी संवाद से दूर हो जाएंगी।
जयंती समारोह का शुभारंभ बैगा और देवार समाज के वरिष्ठ सदस्यों द्वारा पारंपरिक विधि-विधान से भगवान बिरसा मुंडा की पूजा-अर्चना के साथ हुआ। पूजा के बाद आगंतुक अतिथियों एवं वरिष्ठ समाजजनों का स्वागत कर कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत की गई। स्थानीय बच्चों,युवाओं और महिला समूहों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। जनजातीय पारंपरिक नृत्य, गीत और नाटक जैसे कार्यक्रमों ने समारोह को जीवंत बना दिया। उपस्थित लोगों ने कार्यक्रम को सराहा और लगातार तालियों से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। बिरसा मुंडा सेवा समिति दर्रीपारा और समस्त आदिवासी समाज के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस आयोजन में नगर के अलावा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से जनपद अध्यक्ष बसंती भगत और मंडल अध्यक्ष शशिकला भगत उपस्थित रहीं। समाजजनों ने पुष्प गुच्छ और पारंपरिक सम्मान के साथ उनका स्वागत किया। इस मौके पर समाज के प्रमुख और वरिष्ठजन—पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष गोवर्धन भगत, आदिवासी समाज के वरिष्ठ नेता धीरजन उरांव, देवधन भगत, जगमोहन सोनवानी, रामसाय भगत, बसंत कुजूर, किरता राम, रोशन एक्का, पवन साय सोनवानी, कंवर समाज अध्यक्ष अंबिकेश्वर पैकरा, सर्व आदिवासी समाज ब्लॉक अध्यक्ष सुनील नाग, कार्यकारी अध्यक्ष दीपक बुनकर, मीडिया प्रभारी मुनेश्वर राम, तथा लक्ष्मी निकुंज, विनीता टोप्पो, सुशीला लकड़ा, महिमा कुजूर, मंगल साय, सीमा भगत, कमलेश्वर लकड़ा, मानेश्वर टोप्पो सहित बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे। वक्ताओं ने अपने उद्बोधनों में भगवान बिरसा मुंडा के संघर्ष, उनके नेतृत्व और समाज को जागृत करने के संदेशों पर प्रकाश डाला। सभी ने एक स्वर में कहा कि बिरसा मुंडा ने समाज को स्वाभिमान, एकता और अधिकारों की रक्षा का जो मार्ग दिखाया, वह आज भी उतना ही प्रेरणादायक है।
कार्यक्रम के अंत में समाज प्रमुखों ने आपसी भाईचारे को मजबूत करने, नाराज़गी को बातचीत के जरिए दूर करने और समाज को एकजुट रखने का संदेश दिया। अंत में सभी ने भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।”
