👉🏻 दान भूमि बेचकर, सरकारी जंगल उजाड़कर 10–12 एकड़ पर कब्जा — सरपंच, पटवारी और माफियाओं की मिलीभगत उजागर। खबरें सच तक न्यूज़ की बड़ी पड़ताल, प्रशासनिक सुस्ती पर सवाल, जल्द होगी बड़ी कार्यवाही।

जांजगीर-चांपा जिले में भू माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि अब शासकीय भूमि, दान-भूमि और जंगल, सभी उनकी अवैध कमाई का ज़रिया बन गए हैं। बलौदा तहसील के ग्राम पंचायत नवागांव में भूमि माफियाओं ने 2 एकड़ दान भूमि का 10 लाख में सौदा किया, उसमें से 2.5 लाख रुपये एडवांस देकर फर्जी एग्रीमेंट तैयार भी करा लिया। लेकिन अवैध खेल यहीं खत्म नहीं हुआ— फर्जी एग्रीमेंट को आधार बनाकर माफियाओं ने 10–12 एकड़ शासकीय छोटे जंगल-झाड़ की जमीन पर कब्ज़ा कर लिया, सैकड़ों पेड़ों की बलि देकर अवैध राखड़ डंपिंग शुरू कर दी। और सबसे चौंकाने वाली बात— जमीन मालिक को इसकी भनक तक नहीं!

सरपंच का फर्जी NOC — ‘बिना जमीन मालिक’ के अनुमति!
ग्राम पंचायत नवागांव के सरपंच ने, भूमाफियाओं से मिलीभगत कर, जमीन मालिक की गैर-मौजूदगी में ही राखड़ डंपिंग की अनुमति देते हुए फर्जी NOC जारी कर दिया। इस पूरे प्रकरण में सरपंच, ग्राम सचिव, पटवारी और तहसीलदार की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
एक माफिया ने एग्रीमेंट किया, दूसरा बना ‘पावर ऑफ अटॉर्नी’ — और जंगल पर राज शुरू
दो साथियों की यह सुनियोजित साजिश सामने आई है— एक ने 2 एकड़ दान भूमि का एग्रीमेंट अपने नाम करवाया तो दूसरा ‘मुक्तियारी नामा’ (Power of Attorney) बनकर शासकीय जंगल भूमि पर कब्ज़ा करने लग गया। और दोनों ने मिलकर अवैध राखड़ डंप कर, लाल मुरूम उत्खनन शुरू कर दिया।वन क्षेत्र के जंगल को काटकर, सरकारी भूमि को निजी प्रोजेक्ट की तरह इस्तेमाल कर रहे इन माफियाओं के सामने, विभागों की चुप्पी एक बड़ा सवाल है।

अंगूठा छाप इंसान का फर्जी हस्ताक्षर करवाया और फर्जी पर्यावरण अनुमति भी जुटाई!
जांच में यह भी सामने आया कि एक अंगूठा छाप व्यक्ति के फर्जी हस्ताक्षर करवाए गए, पर्यावरण विभाग से फर्जी अनुमति पत्र लेकर राखड़ डंपिंग को ‘वैध’ बताने की कोशिश की गई। साथ ही साथ दान पट्टे की सरकारी जमीन की पर्ची बनाकर बिक्री की जा रही है, यह सीधे-सीधे भू-माफिया सिंडिकेट का मामला है।
पटवारी–तहसीलदार को कई बार सूचना, फिर भी कार्रवाई शून्य — क्यों?
खबरें सच तक न्यूज़ द्वारा बार-बार पटवारी और तहसीलदार को इस अवैध कब्ज़े की जानकारी दी गई, पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिससे यह संदेह और गहरा हो जाता है कि… क्या विभाग की चुप्पी भी सौदे का हिस्सा है?
जंगल उजाड़, राखड़ डंपिंग जारी, सरकारी तंत्र मौन क्यों?
जहां नवागांव के छोटे जंगल झाड़ की भूमि में— सैकड़ों हरे-भरे पेड़ काटे गए। भारी मशीनों से लाल मुरूम निकाला जा रहा है, ट्रैक्टर-हाइवा से राखड़ डंप जारी, ग्रामीण विरोध करने से डरे हुए, ग्राम पंचायत की खुली मिलीभगत और प्रशासन की सुस्ती, दोनों ही सवालों के घेरे में हैं।
कलेक्टर ने लिया संज्ञान — अब बड़ा खुलासा और कार्रवाई की तैयारी।
इस पूरे मामले को जब सच तक न्यूज़ ने जिला कलेक्टर तक पहुँचाया, तो कलेक्टर ने तुरंत संज्ञान लेकर जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए।
सूत्रों के अनुसार प्रशासन अब इस पूरे प्रकरण में—फर्जी NOC जारी करने वाले सरपंच-सचिव, फर्जी एग्रीमेंट कराने वाले भू-माफिया और अवैध कब्ज़ा कराने वाले पटवारी-राजस्व अमले साथ ही साथ जंगल काटने और राखड़ डंपिंग में शामिल ठेकेदार सहित सभी पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी में है।

अब शुरू होगा ‘कॉमडाउन’ — माफियाओं में हड़कंप
नवागांव में सालों से सक्रिय भूमि और राखड़ माफियाओं के खिलाफ अब प्रशासन की नजर सख्त हो चुकी है। कलेक्टर के आदेश के बाद जिले में इन माफियाओं के बीच हड़कंप का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर अब कार्रवाई हो गई, तो शासकीय भूमि, जंगल और ग्राम की संपत्ति को दोबारा बचाया जा सकता है।वही खबरें सच तक न्यूज़ के टीम का साफ कहना है– हम हर अपडेट, हर कार्रवाई और हर दोषी अधिकारी-माफिया की भूमिका उजागर करेंगे। क्योंकि सरकारी जमीनें लूटनेवालों का अंत अब तय है।
