
सुदीप यादव/सामरी बलरामपुर
सामरी। आज जब खेती को अलाभकारी मानकर युवा शहरों की ओर रुख कर रहे हैं, वहीं सामरी विधानसभा के गोपातु गांव के युवा किसान प्रीतम गुप्ता टाऊ की खेती से अपनी नई पहचान बना रहे हैं। आधुनिक तकनीक, कम लागत और जिम्मेदार मेहनत के बल पर प्रीतम न सिर्फ बेहतर उत्पादन ले रहे हैं, बल्कि गांव के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा भी बन गए हैं।
प्रीतम बताते हैं कि पारंपरिक फसलों की तुलना में टाऊ की खेती में सिंचाई कम लगती है और रोग-कीट का प्रकोप भी अपेक्षाकृत कम रहता है। इस वर्ष उन्होंने लगभग निर्धारित कृषि भूमि में टाऊ की बुवाई की, जिससे अब तक अनुमानित रूप से अच्छी पैदावार मिलने की उम्मीद है। बाजार में टाऊ की बढ़ती मांग के कारण इससे आमदनी भी बेहतर हो रही है।
गांव के बुजुर्ग किसानों का कहना है, कि पहले इस फसल को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता था, लेकिन अब इसके वाणिज्यिक मूल्य को समझते हुए युवा किसान इसकी ओर आकर्षित हो रहे हैं। कृषि विभाग भी समय–समय पर तकनीकी मार्गदर्शन, जैविक खाद उपयोग व बाजार संबंधी जानकारी देकर किसानों को प्रोत्साहित कर रहा है।
प्रीतम गुप्ता का प्रयास ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई दिशा की ओर इशारा करता है—स्थानीय संसाधन, वैज्ञानिक खेती और सकारात्मक सोच से खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है। गांव के अन्य युवा भी अब इस नई खेती मॉडल को अपनाने की तैयारी कर रहे हैं।
