Wednesday, February 11, 2026
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श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ एवं विराट संत सम्मेलन में सम्मिलित हुए ठा आशीष सिंह चंदेल

श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ एवं विराट संत सम्मेलन में सम्मिलित हुए ठा आशीष सिंह चंदेल*

जांजगीर,,,शिवरीनारायण में दूधाधारी मठ में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा महापुराण के विश्रांति दिवस में सम्मिलित हुए ठा आशीष सिंह चंदेल श्री स्वामी मधुसूदनाचार्य वेदांताचार्य जी के मुखारविंद से सभी श्रोतागर भाव विभोर हुए महाराज जी ने कथा में सभी भक्तों को बताया किसुदामा और कृष्णा बचपन के मित्र थे, साथ में सान्दीपनि ऋषि के आश्रम में शिक्षा प्राप्त की थी सुदामा की पत्नी सुधर्मा ने उन्हें कृष्ण से मदद मांगने के लिए द्वारका भेजा सुदामा के पास कुछ भी नहीं था, लेकिन उनके पास मित्रता की पूंजी थी कृष्ण ने सुदामा का स्वागत किया, उन्हें आदर से बैठाया और उनकी गरीबी को दूर किया सुदामा ने कृष्ण से कुछ नहीं मांगा, लेकिन कृष्ण ने उन्हें बहुत कुछ दिया सुदामा की मित्रता की परीक्षा हुई और कृष्ण ने उन्हें अपना सच्चा मित्र साबित किया सुदामा की गरीबी दूर हुई, लेकिन उनकी मित्रता की पूंजी और भी बढ़ गई कृष्ण और सुदामा की मित्रता एक आदर्श मित्रता का उदाहरण है सुदामा ने अपने जीवन में कभी भी कृष्ण से कुछ नहीं मांगा, लेकिन कृष्ण ने उन्हें सब कुछ दिया सुदामा की कहानी हमें मित्रता का महत्व सिखाती है सुदामा और कृष्ण की मित्रता ने हमें सिखाया कि मित्रता में कोई गरीब या अमीर नहीं होता सुदामा की पत्नी सुधर्मा ने उन्हें कृष्ण से मदद मांगने के लिए प्रेरित किया सुदामा ने अपने जीवन में सच्ची मित्रता का उदाहरण पेश किया कृष्ण ने सुदामा को अपना सच्चा मित्र माना और उन्हें सम्मान दिया सुदामा की कहानी हमें सिखाती है कि मित्रता एक अनमोल रिश्ता है सुदामा और कृष्ण की मित्रता ने हमें सिखाया कि मित्रता में विश्वास और प्रेम होना चाहिए सुदामा की गरीबी दूर हुई, लेकिन उनकी मित्रता की पूंजी और भी बढ़ गई कृष्ण और सुदामा की मित्रता एक आदर्श मित्रता का उदाहरण है सुदामा ने अपने जीवन में कभी भी कृष्ण से कुछ नहीं मांगा, लेकिन कृष्ण ने उन्हें सब कुछ दिया सुदामा की कहानी हमें मित्रता का महत्व सिखाती है और हमें सिखाती है कि मित्रता में कोई गरीब या अमीर नहीं होता

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