Wednesday, February 11, 2026
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हजारों खाता धारकों की गाढ़ी कमाई हड़पने वाला 420 नटवरलाल का महागुरु निकला दीपक कुमार देवांगन, एक करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी का आरोप

कहते हैं कि सादा दिखने वाला व्यक्ति हमेशा निर्दोष नहीं होता। चांपा नगर में सामने आया ताज़ा मामला इसी कहावत को चरितार्थ करता है। चांपा निवासी दीपक कुमार देवांगन पर हजारों खाता धारकों से विश्वासघात कर एक करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी करने का गंभीर आरोप लगा है। वर्षों तक चांपा मुख्य डाकघर में एजेंट के रूप में सक्रिय रहे दीपक ने पोस्ट ऑफिस की विभिन्न जमा योजनाओं का हवाला देकर सैकड़ों लोगों की जीवन भर की कमाई हड़प ली और अब फरार बताया जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार दीपक कुमार देवांगन को डाक एवं तार विभाग द्वारा उसकी पत्नी और बहन के नाम पर जमा योजनाएं संचालित करने का लाइसेंस मिला हुआ था। इसी लाइसेंस की आड़ में वह सेविंग अकाउंट, रिकरिंग डिपॉजिट (आरडी) और फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) जैसी योजनाओं में खाता खुलवाने और रकम जमा कराने में लोगों की मदद करता था। शुरुआत में उसने ईमानदारी और व्यवहार कुशलता से लोगों का भरोसा जीता। घर-घर, दुकानों और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में जाकर वह खाता खोलने की सुविधा देता, जिससे लोग उससे बेहद प्रभावित हुए।

बताया जाता है कि लगभग 800 से अधिक लोगों ने दीपक के माध्यम से चांपा पोस्ट ऑफिस में खाते खुलवाए। अधिकांश मामलों में खाता खुलते समय ओपनिंग अमाउंट पोस्ट ऑफिस में जमा कर दिया जाता था, जिसके बाद नियमित किस्तें या रकम एजेंट दीपक स्वयं घर या दुकान पर जाकर लेता था। वह ग्राहकों को भरोसा दिलाता था कि महीने के अंतिम सप्ताह में सारी रकम पोस्ट ऑफिस में एकमुश्त जमा कर दी जाएगी। ग्राहकों को संतुष्ट रखने के लिए वह कच्ची डायरी में रोज़ाना रकम प्राप्ति की एंट्री भी कर देता था, जिससे खाता धारकों का विश्वास और गहरा होता चला गया।

इसी भरोसे का फायदा उठाते हुए दीपक ने वर्षों तक सुनियोजित तरीके से धोखाधड़ी की। सूत्रों के मुताबिक अधिकांश खातों में ओपनिंग अमाउंट के बाद कभी कोई अगली रकम जमा ही नहीं की गई। इसके बावजूद खाता धारकों को लंबे समय तक इस गड़बड़ी की भनक नहीं लगी। लगभग पांच वर्षों के भीतर दीपक ने अलग-अलग खातों से प्रतिदिन छोटी-छोटी रकम इकट्ठा कर एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि हड़प ली।

कुछ समय पूर्व जब दीपक अचानक अपने ग्राहकों से संपर्क में आना बंद कर दिया और उसके घर पर भी ताला लटका मिला, तब खाता धारकों को शक हुआ। एक-दूसरे से जानकारी साझा करने पर यह बात जंगल की आग की तरह फैल गई। आनन-फानन में सैकड़ों लोग पहले चांपा पोस्ट ऑफिस पहुंचे, जहां उन्हें अपने खातों में जमा राशि न होने की जानकारी मिली। इसके बाद बड़ी संख्या में पीड़ित खाता धारक चांपा थाना पहुंचे और पूरे घटनाक्रम की शिकायत दर्ज कराई।

इस पूरे मामले ने सैकड़ों परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। किसी ने बच्चों की पढ़ाई के लिए तो किसी ने बेटा-बेटी की शादी के लिए, किसी ने घर बनाने और किसी ने बुढ़ापे की सुरक्षा के लिए अपनी गाढ़ी कमाई जमा कर रखी थी। आज वही लोग खुद को ठगा हुआ और आर्थिक अंधकार में डूबा महसूस कर रहे हैं। कई परिवार ऐसे हैं जिनके लिए यह रकम जीवन भर की पूंजी थी, और अब उससे उबर पाना बेहद कठिन नजर आ रहा है।

पीड़ितों की जुबानी यह भी सवाल उठ रहा है कि आखिर इतने वर्षों तक पोस्ट ऑफिस प्रशासन की नजर इस अनियमितता पर क्यों नहीं पड़ी। खाता धारकों का कहना है कि जब सैकड़ों खातों में ओपनिंग अमाउंट के बाद कोई लेनदेन नहीं हो रहा था, तब भी संबंधित अधिकारियों ने न तो एजेंट से पूछताछ की और न ही खाताधारकों को सूचित किया। लोगों का आरोप है कि इसी लापरवाही और अनदेखी ने दीपक को इतना बड़ा जालसाज बनने का मौका दिया।

फिलहाल दीपक कुमार देवांगन अपने निवास स्थान से लापता है और गठित जांच टीम की पकड़ से बाहर बताया जा रहा है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, वहीं पीड़ित खाताधारकों द्वारा उच्च स्तरीय जांच की मांग की जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम उठाए जाते, तो आज सैकड़ों परिवार इस त्रासदी का शिकार नहीं होते।

इस घटना के बाद आत्ममंथन का दौर भी शुरू हो गया है। कई खाताधारक खुद को दोषी मानते हुए कह रहे हैं कि उन्होंने समय-समय पर अपने खातों की जांच क्यों नहीं की, पासबुक अपने पास क्यों नहीं रखी और एजेंट पर आंख मूंदकर भरोसा क्यों किया। लेकिन अब यह पछतावा किसी काम का नहीं रह गया है।

चांपा का यह मामला न केवल एक बड़े आर्थिक घोटाले की कहानी है, बल्कि यह आम लोगों के लिए एक कड़वा सबक भी है कि किसी भी वित्तीय लेनदेन में सावधानी और नियमित जांच कितनी जरूरी है। अब सबकी निगाहें पुलिस जांच और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं, ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके और दोषियों को सख्त सजा।

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