छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले से शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। कसडोल विकासखंड के अंतर्गत आने वाले शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय कोर्राडीह में पदस्थ गणित शिक्षक राजेंद्र कुमार नवरतन पिछले तीन महीने से स्कूल से नदारत हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक न निलंबन, न सख्त कार्रवाई! शिकायतें कहां-कहां नहीं पहुंचीं? विकासखंड कार्यालय से लेकर जिला शिक्षा अधिकारी, और यहां तक कि संयुक्त संचालक शिक्षा, रायपुर तक—मगर नतीजा शून्य! आखिर क्यों?

क्या विभागीय अफसर किसी दबाव में हैं? या फिर किसी “खास” को बचाने की कोशिश हो रही है? तीन महीने से शिक्षक गायब है, बच्चों की पढ़ाई ठप, गणित जैसे महत्वपूर्ण विषय का नुकसान, लेकिन शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी वार्षिक वेतन वृद्धि रोककर अपनी पीठ थपथपा रहे हैं—मानो यही सबसे बड़ी कार्रवाई हो!
सवाल अब विभाग जिम्मेदार अफसरों:–
▪️ जब शिक्षक तीन महीने से नदारत है तो निलंबन क्यों नहीं?
▪️ क्या नियम सिर्फ छोटे कर्मचारियों के लिए हैं?
▪️ क्या शिक्षा विभाग में जवाबदेही खत्म हो चुकी है?
▪️ बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी कौन लेगा?
डबल इंजन की सरकार में अफसरशाही इस कदर बेलगाम हो चुकी है कि सरकारी स्कूल भगवान भरोसे छोड़ दिए गए हैं।जनता का भरोसा शिक्षा विभाग से उठता जा रहा है और विभाग की जमकर किरकिरी हो रही है।

अब बड़ा सवाल यह है— खबर चलने के बाद क्या जिम्मेदार अधिकारी नींद से जागेंगे? या फिर हमेशा की तरह इस मामले को भी टालमटोल कर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा? जनता जवाब चाहती है, बच्चे इंसाफ चाहते हैं, और अब पूरा प्रदेश देख रहा है— क्या 3 महीने से नदारत शिक्षक पर होगी कार्रवाई, या फिर सिस्टम एक बार फिर फेल साबित होगा? यह सिर्फ एक खबर नहीं, यह शिक्षा व्यवस्था पर करारा तमाचा है!
