अजय दास (जिला संवाददाता, जांजगीर-चांपा)
छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में आज सवाल सिर्फ अवैध नशे का नहीं है… सवाल है प्रशासन की नीयत, सवाल है आबकारी विभाग की चुप्पी, और सवाल है उस संरक्षण का, जिसकी छाया में ज़हर खुलेआम बिक रहा है!जहां आज जांजगीर-चांपा जिला मुख्यालय की सड़कों पर सैकड़ों महिलाएं उतरीं… हाथों में तख्तियां…आंखों में आक्रोश… और सवालों में सिर्फ एक मां — अवैध नशे पर लगाम या जिम्मेदारों पर कार्रवाई!

ये तस्वीरें किसी आंदोलन की नहीं… ये तस्वीरें उस बेबस सिस्टम के खिलाफ बगावत की हैं, जहां महिला कल्याण समिति की सैकड़ों महिलाओं ने रैली निकालकर शासन और प्रशासन दोनों को आईना दिखाने का काम किया है। महिलाओं का आरोप साफ है— जिले में अवैध नशीली पदार्थों की बिक्री खुलेआम जारी है, ग्रामीण इलाकों में घरों से कच्ची महुआ शराब बन रही है, और पूरा माहौल ज़हरीले नशे की गिरफ्त में है। हैरानी की बात ये है कि आबकारी विभाग के जिम्मेदार अधिकारी लगातार दावे तो करते हैं… लेकिन जमीनी हकीकत उन दावों की पोल खोल रही है! ग्रामीण क्षेत्रों में हालात ऐसे हैं कि हर गली, हर मोहल्ले में अवैध शराब आसानी से मिल जाती है।शिकायतें हुईं, ज्ञापन दिए गए, अधिकारियों को बार-बार अवगत कराया गया… लेकिन नतीजा—सिर्फ सन्नाटा! अब सवाल उठता है कि– क्या आबकारी विभाग नाकाम है? या फिर अवैध कारोबारियों को संरक्षण मिल रहा है? आखिर क्यों इंस्पेक्टरों को बचाने में जुटे रहते हैं जिम्मेदार अधिकारी?जब जनता चीख रही है, महिलाएं सड़कों पर हैं… तो फिर कार्रवाई कहां है? महिलाओं का साफ कहना है कि अगर समय रहते अवैध नशे पर रोक नहीं लगी, तो गांव-गांव में सामाजिक बर्बादी तय है।
जांजगीर-चांपा में ये रैली सिर्फ विरोध नहीं… ये आखिरी चेतावनी है! अब देखना ये होगा कि आबकारी विभाग जागता है या फिर महिलाओं का ये गुस्सा पूरे सिस्टम को कठघरे में खड़ा कर देता है!
