Sunday, March 29, 2026
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सलखन में शासकीय ज़मीन पर कब्ज़ा – राजस्व विभाग की ‘खामोशी’ सवालों के घेरे में जिम्मेदार।

सलखन में शासकीय ज़मीन पर कब्ज़ा – राजस्व विभाग की ‘खामोशी’ सवालों के घेरे में जिम्मेदार।

जांजगीर-चांपा जिले के शिवरीनारायण तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत सलखन में शासकीय ज़मीन पर लगातार बढ़ते अवैध कब्ज़े ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बेदखली आदेश जारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं, ग्रामीणों की शिकायतों का अंबार… और राजस्व विभाग के अधिकारी अब भी मौन। क्या जिम्मेदारों की चुप्पी ही कब्ज़ाधारियों की ताकत बन चुकी है?

बता दे कि ग्राम पंचायत सलखान यहां खसरा नंबर 4035/1 की शासकीय ज़मीन सालों से कुछ लोगों की दबंगाई की भेंट चढ़ी हुई है। राजस्व विभाग ने बेदखली आदेश भले जारी कर दिया, लेकिन जमीन पर कब्ज़ा जस का तस। बल्कि कब्जाधारियों ने तो शासकीय भूमि पर धान बोकर खुलेआम कानून को चुनौती दे डाली। इतना ही नहीं—पूरी जमीन को जालीदार तार से घेर दिया गया, जैसे यह किसी की निजी संपत्ति हो। और यह पूरा तमाशा राजस्व विभाग की आंखों के सामने होता रहा। इधर ग्रामीण थक चुके हैं, बार–बार शिकायतें, तहसील कार्यालय के चक्कर… लेकिन जिम्मेदार अधिकारी न तो मौके पर पहुंचे, न ही कोई कार्रवाई। तो वही ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि यदि अधिकारी कार्रवाई चाहते तो एक दिन में जमीन मुक्त हो जाती, लेकिन उनकी खामोशी दबंगों को और ताकत दे रही है।सबसे ज्यादा परेशान हैं पीछे बसे कृषक, जिनकी निजी जमीन तक जाने का रास्ता अवैध कब्जे ने बंद कर दिया है। आवागमन ठप खेती प्रभावित और प्रशासन चुप!

अब बड़ा सवाल– जब बेदखली आदेश अस्तित्व में है, तो कार्रवाई कहां अटक गई?

क्या कब्जाधारियों के सामने प्रशासन बेबस है? या फिर स्थानीय स्तर पर राजस्व विभाग की ‘चुप्पी’ ही पूरे खेल की सबसे बड़ी सुराग है? ग्रामीणों की मांग साफ है, उच्च अधिकारी तत्काल संज्ञान लें, अवैध कब्ज़ा हटाएँ और जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई हो।

सलखान की शासकीय भूमि पर कब्ज़ा सिर्फ एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का आईना है। उच्च अधिकारियों के लिए यह मामला अब सिर्फ शिकायत नहीं—राजस्व विभाग पर जनता के भरोसे की परीक्षा बन चुका है।

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