जिला सहकारिता प्रकोष्ठ परिचय समागम में जुटे दिग्गज, भ्रष्टाचार मुक्त और सेवाभावी सहकारिता मॉडल पर जोर।

जांजगीर। सहकारिता के माध्यम से अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने के संकल्प के साथ जिला मुख्यालय में आयोजित जिला सहकारिता प्रकोष्ठ परिचय समागम ने एक नई ऊर्जा और दिशा का संचार किया। भारतीय जनता पार्टी जिला कार्यालय में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में प्रदेश से लेकर जिला स्तर तक के प्रमुख पदाधिकारी और कार्यकर्ता एक मंच पर नजर आए।कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता एवं महापुरुषों के चित्र पर दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण के साथ हुआ। राष्ट्रभक्ति के माहौल में गूंजते वंदे मातरम् ने पूरे सभागार को ऊर्जा से भर दिया। मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे प्रवीण दुबे (प्रदेश संयोजक, सहकारिता प्रकोष्ठ) ने अपने ओजस्वी संबोधन में सहकारिता को सिर्फ एक विभाग नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण का मजबूत माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि “एक सबके लिए, सब एक के लिए” की भावना से ही प्रदेश में भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी सहकारिता मॉडल स्थापित किया जाएगा।उन्होंने आगे जोर देते हुए कहा कि समितियों के माध्यम से किसानों को खाद, बीज, ऋण और अन्य सुविधाएं सरलता से उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है। साथ ही सहकारिता मित्र सदस्यता अभियान को गति देते हुए हर समिति में 100 सदस्य जोड़ने का लक्ष्य तय किया गया है।

विशिष्ट अतिथि गुलाब सिंह चंदेल (प्रदेश कार्य समिति सदस्य) ने सहकारिता को जनसेवा और राष्ट्रभक्ति का सशक्त जरिया बताते हुए कहा कि बेहतर समन्वय और पारदर्शिता से ही योजनाओं का लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक पहुंचाया जा सकता है। संभाग प्रभारी जितेन्द्र धुरंधर और पूर्व जिला अध्यक्ष संतोष लहरे ने भी सहकारिता के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया। कार्यक्रम में उपस्थित पदाधिकारियों ने एक स्वर में संकल्प लिया कि सहकारिता के नेटवर्क को ब्लॉक से लेकर ग्राम स्तर तक मजबूत किया जाएगा और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जाएगा। समारोह में बड़ी संख्या में प्राधिकृत अधिकारी, कार्य समिति सदस्य और कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन अधिवक्ता रोहिणी कश्यप ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन शरद चंद्र शर्मा (जिला संयोजक, सहकारिता प्रकोष्ठ जांजगीर-चांपा) ने किया।
खास बाते:– यह समागम केवल परिचय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सहकारिता के माध्यम से आत्मनिर्भर और सशक्त भारत की दिशा में एक मजबूत कदम बनकर उभरा।
