जांजगीर-चांपा, 11 अगस्त 2026। आगामी 12 सितंबर 2026 को आयोजित होने वाली नेशनल लोक अदालत को सफल बनाने जिला न्यायालय जांजगीर ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में मंगलवार को जिला न्यायालय के सभागार में विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारियों की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में लंबित एवं प्री-लिटिगेशन मामलों को अधिक से अधिक संख्या में आपसी सहमति और समझौते के जरिए समाप्त करने की रणनीति पर मंथन हुआ। माननीय राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के निर्देशानुसार आयोजित बैठक की अध्यक्षता प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री शैलेन्द्र चौहान, द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री गणेश राम पटेल तथा सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जांजगीर श्री मनोज कुमार कुशवाहा ने की। बैठक में विद्युत, दूरसंचार, नगरपालिका, वन, श्रम, कृषि, महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण विभाग के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे। न्यायिक अधिकारियों ने प्रत्येक विभाग से संबंधित मामलों की समीक्षा करते हुए लोक अदालत में अधिकतम प्रकरणों के निराकरण के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

बिजली बिल से लेकर संपत्ति कर तक—मामलों के समाधान पर फोकस
विद्युत विभाग को बिजली बिल बकाया, अवैध कनेक्शन एवं शमन शुल्क से जुड़े मामलों में नियमानुसार उपलब्ध छूट का लाभ देते हुए अधिक से अधिक प्रकरणों का निराकरण सुनिश्चित करने कहा गया।
नगरपालिका से जलकर, संपत्ति कर एवं अन्य नगरीय करों से जुड़े लंबित मामलों की पहचान कर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करने और लोक अदालत के माध्यम से समाधान की दिशा में प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
वहीं दूरसंचार विभाग से बीएसएनएल सहित अन्य सेवाओं के बकाया टेलीफोन एवं मोबाइल बिल से जुड़े मामलों को आपसी सहमति के आधार पर निपटाने की कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया गया।
वन और श्रम विभाग के मामलों पर भी विशेष नजर
वन विभाग के शमनीय वन अपराधों तथा श्रम विभाग से संबंधित श्रमिकों के लंबित भुगतान एवं विवादों को लोक अदालत के समक्ष प्रस्तुत कर त्वरित समाधान कराने पर सहमति बनी।
इसी तरह महिला एवं बाल विकास विभाग तथा समाज कल्याण विभाग से जुड़े भरण-पोषण, पारिवारिक विवाद, दिव्यांगजन एवं वृद्धजनों के कल्याण से संबंधित मामलों को संवेदनशीलता के साथ समझौते के माध्यम से सुलझाने पर विशेष जोर दिया गया।
कृषि विभाग को विभागीय योजनाओं, ऋण एवं अन्य विधिक मामलों की समीक्षा कर पात्र प्रकरणों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए, ताकि उन्हें आगामी लोक अदालत में निराकरण के लिए प्रस्तुत किया जा सके।
“लोक अदालत में दोनों पक्षों की जीत”—समझौते से समाधान की अपील
बैठक के अंत में न्यायिक अधिकारियों ने सभी विभागों से अपील की कि लंबे समय से लंबित कानूनी एवं विभागीय विवादों को आपसी सहमति और समझौते के माध्यम से समाप्त करने के लिए नेशनल लोक अदालत का अधिक से अधिक लाभ उठाया जाए।
लोक अदालत की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि यहां विवादों का समाधान आपसी सहमति से होता है, जिससे पक्षकारों के समय और धन दोनों की बचत होती है। यही कारण है कि आगामी 12 सितंबर की नेशनल लोक अदालत में अधिक से अधिक लंबित और प्री-लिटिगेशन मामलों के निराकरण को लेकर जिला न्यायालय ने विभागवार तैयारी और लक्ष्य पर जोर दिया है।
अब नजर 12 सितंबर पर है—जब अदालत में मुकदमेबाजी से ज्यादा समझौते और समाधान की राह खुलेगी।
