जांजगीर-चांपा/नवागढ़। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ विकासखंड के एक शासकीय प्राथमिक विद्यालय से जुड़े कथित वीडियो के वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। सोशल मीडिया में तेजी से प्रसारित हो रहे इस वीडियो को लेकर स्थानीय लोगों और अभिभावकों के बीच भारी नाराजगी देखी जा रही है। बताया जा रहा है कि वायरल वीडियो में विद्यालय से जुड़े एक शिक्षक और शिक्षिका कथित रूप से आपत्तिजनक स्थिति में दिखाई दे रहे हैं। हालांकि वीडियो की सत्यता तथा उसमें दिखाई देने वाले व्यक्तियों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। इसके बावजूद पूरे घटनाक्रम ने शिक्षा व्यवस्था और विद्यालयों की कार्यसंस्कृति को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि मामला विद्यालय प्रबंधन के संज्ञान में था, तो इसकी जानकारी उच्च अधिकारियों को तत्काल क्यों नहीं दी गई। स्थानीय स्तर पर यह आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि मामले को दबाने का प्रयास किया गया। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
इधर वीडियो वायरल होने के बाद भी संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई स्पष्ट सार्वजनिक कार्रवाई या आधिकारिक बयान सामने नहीं आने से लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय बच्चों के भविष्य निर्माण का केंद्र होता है और उससे जुड़ा कोई भी विवाद पारदर्शी जांच का विषय होना चाहिए। प्रदेश सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन यदि विद्यालयों में अनुशासन और जवाबदेही पर सवाल उठते हैं तो यह पूरे तंत्र की विश्वसनीयता को प्रभावित करता है। ऐसे में लोगों की मांग है कि वायरल वीडियो की निष्पक्ष जांच कराई जाए, तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए तथा दोषी पाए जाने वालों पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए। अब सबकी निगाहें शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर टिकी हैं कि वे इस पूरे मामले में क्या कदम उठाते हैं और कब तक वास्तविक स्थिति जनता के सामने आती है।
