मस्तूरी (बिलासपुर)। शिक्षा का मंदिर कहलाने वाले स्कूल में यदि बच्चों की सुरक्षा ही दांव पर लग जाए, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि गंभीर चिंता का विषय बन जाता है। बिलासपुर जिले के मस्तूरी विकासखंड अंतर्गत सेंट पॉल कॉन्वेंट हायर सेकेंडरी स्कूल, बकरकूदा पर छात्रों के परिवहन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।

मौके से सामने आए दृश्य और प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्कूल में बच्चों के परिवहन के लिए कथित रूप से ऐसे वाहनों का उपयोग किया जा रहा है जिनमें क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाया जा रहा है। कई बच्चे वाहन के पिछले हिस्से और दरवाजे के पास बैठे दिखाई देते हैं, जिससे उनकी सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न होने की आशंका है। यदि ये तथ्य जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी स्थापित व्यवस्थाओं और नियमों की अनदेखी का मामला हो सकता है।

इतना ही नहीं, स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ वाहनों का फिटनेस प्रमाणपत्र संदेह के घेरे में है तथा एक वाहन ऐसे व्यक्ति द्वारा चलाया जा रहा है जिसकी उम्र लगभग 17 वर्ष बताई जा रही है। इन दावों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी, लेकिन यदि यह सत्य पाया जाता है तो यह मोटर वाहन कानून का गंभीर उल्लंघन होगा।

सबसे हैरान करने वाला आरोप यह भी है कि कुछ बच्चों से वाहन पर चढ़कर सामान रखने या उतारने जैसा कार्य कराया जा रहा है। यदि जांच में इसकी पुष्टि होती है, तो यह न केवल बच्चों की सुरक्षा बल्कि उनके अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय होगा।

एक ओर छत्तीसगढ़ सरकार सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। दूसरी ओर स्कूल परिवहन को लेकर समय-समय पर प्रशासन और पुलिस द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जाते रहे हैं। ऐसे में यदि किसी भी स्तर पर नियमों की अनदेखी हुई है, तो यह अत्यंत गंभीर मामला है।

इस पूरे प्रकरण पर मस्तूरी विकासखंड शिक्षा अधिकारी शिवराम टंडन ने संज्ञान लेते हुए संबंधित स्कूल को नोटिस जारी करने तथा मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की बात कही है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या यह कार्रवाई केवल नोटिस तक सीमित रहेगी, या जांच के आधार पर यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो बच्चों की सुरक्षा से समझौता करने वालों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई भी होगी? मासूम बच्चों की सुरक्षा किसी भी संस्था की पहली जिम्मेदारी है। यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई आवश्यक है, ताकि भविष्य में किसी भी बच्चे की जान जोखिम में न पड़े।
