Thursday, April 16, 2026
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फार्मर आईडी अब अनिवार्य: बिना पंजीकरण नहीं मिलेगा खाद, खरीफ में सख्त नियम लागू

एग्रीस्टेक पोर्टल से जुड़े बिना नहीं मिलेगी उर्वरक की सुविधा, सरकार का बड़ा फैसला—बिचौलियों पर लगेगा लगाम।

जांजगीर-चांपा जिला:– खरीफ सीजन में किसानों को उर्वरक वितरण में पारदर्शिता लाने और सब्सिडी का लाभ सीधे वास्तविक किसानों तक पहुंचाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब किसानों को सहकारी एवं निजी विक्रय केन्द्रों से खाद प्राप्त करने के लिए एग्रीस्टेक पोर्टल में फार्मर आईडी बनवाना अनिवार्य कर दिया गया है। उप संचालक कृषि जांजगीर के अनुसार, इस नई व्यवस्था के तहत उर्वरकों का वितरण किसानों के पंजीकृत रकबे के आधार पर किया जाएगा। यानी अब जितनी जमीन पोर्टल में दर्ज होगी, उसी के अनुसार खाद उपलब्ध कराई जाएगी।

क्या है फार्मर आईडी– फार्मर आईडी किसानों की एक डिजिटल पहचान है, जो केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयास एग्रीस्टेक योजना के तहत तैयार की जा रही है। यह आधार कार्ड की तरह एक यूनिक आईडी होती है। जिसमें किसान का व्यक्तिगत विवरण,  बैंक खाते की जानकारी, भू-अभिलेख (भुईया पोर्टल के अनुसार) जुड़ा रहता है।

🚫 कालाबाजारी पर कसेगा शिकंजा:–  इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य खाद की कालाबाजारी रोकना, बिचौलियों पर नियंत्रण करना और वास्तविक किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराना है। अब बिना पंजीकरण के खाद मिलना लगभग असंभव होगा।

⚠️ किसानों के लिए जरूरी सूचना:– जिन किसानों ने अभी तक फार्मर आईडी नहीं बनवाई है, उन्हें जल्द से जल्द पंजीकरण कराने की सलाह दी गई है। अन्यथा खरीफ सीजन में उन्हें खाद लेने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

📑 ऐसे बनवाएं फार्मर आईडी:– किसान निम्न माध्यमों से आसानी से पंजीकरण कर सकते हैं—

एग्रीस्टेक पोर्टल पर स्वयं

नजदीकी सहकारी समिति

चॉइस सेंटर

आवश्यक दस्तावेज:

आधार कार्ड

बैंक पासबुक

बी-1 (खसरा)

📞 मदद के लिए संपर्क करें:– किसान अधिक जानकारी के लिए अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी या पटवारी से संपर्क कर सकते हैं।

📢 निष्कर्ष:– सरकार का यह फैसला किसानों के हित में बड़ा कदम माना जा रहा है, लेकिन समय रहते पंजीकरण नहीं कराने वाले किसानों के लिए यह परेशानी का कारण भी बन सकता है। खरीफ सीजन से पहले फार्मर आईडी बनवाना अब हर किसान के लिए जरूरी हो गया है।

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